अगर आपको पता है कि डेथ वारंट क्या होता है और यह किसके द्वारा दिया जाता है तो बहुत अच्छी बात हैं और अगर नहीं पता तो फ़िक्र मत कीजिए उसके लिए मैं हूँ न तो चलिए आज मै आपको बताता हूँ कि डेथ वारंट क्या होता हैं और किसके द्वारा दिया जाता हैं ?

डेथ वारंट या ब्लैक वारंट क्या होता हैं?

यह एक प्रकार का फॉर्म होता है जो कोड ऑफ क्रिमिनल प्रोसीजर 1973 के तहत जारी किया गया है। डेथ वारंट या ब्लैक वारंट दोनों एक ही  हैं यह जेल के अधीक्षक को संबोधित किया जाने वाला वारंट होता है। यह वारंट, उस अपराधी की पहचान बताता है जिसे अदालत ने मौत की सजा दी है | आसान शब्दों में डेथ वारंट एक अदालत द्वारा जारी किए गए नोटिस का एक प्रकार है, जो एक दोषी, जिसे मौत की सजा दी गई है या उसकी फांसी के समय और सजा के स्थान की घोषणा करता है।

डेथ वारंट में क्या क्या होता हैं ?

1 . जेल में रहने वाले अपराधियों को जेल में रखने के दौरान एक नंबर दिया जाता है सबसे पहले फॉर्म में उस नंबर को भरा जाता है।

2 . उसके बाद जिन अपराधियों को फांसी की सज़ा होती है उन अपराधियों की संख्या और उन अपराधियों के पूरे नाम उस फॉर्म पर लिखे जाते हैं।

3 . फिर उस फॉर्म पर वह नंबर लिखा जाता है जिस नंबर से उन अपराधियों का केस दर्ज कराया गया था ।

4 . उसके बाद उस फॉर्म में एक और कॉलम होता है जिसने डेथ वारंट जारी की जाने वाली तारीख लिखी जाती है।

5 . अपराधियों को किस दिन किस समय और किस जगह पर फांसी देनी है इस बात का पूरा ब्यौरा भी उस फॉर्म में लिखा जाता है।

क्या डेथ वारंट की स्थति में अपराधियों के पास कोई अधिकार होते हैं ?

ऐसी स्थति में अपराधियों को भी कुछ अधिकार दिए गए है जिनका वो प्रयोग कर सकते है जैसे कि कोर्ट में अपील करने का अधिकार जिससे वह हाई कोर्ट में अपील कर सकते है। हाई कोर्ट द्वारा अपील  ख़ारिज करने पर वह सुप्रीम कोर्ट मे अपील कर सकते है सुप्रीम कोर्ट द्वारा अपील ख़ारिज करने पर  उसके बाद वह राष्ट्रयपति के पास माफ़ी याचिका करते है | लेकिन राष्टीयपति द्वारा माफ़ी याचिका ख़ारिज करने पर सेशन कोर्ट मे फांसी की सजा पक्की हो जाती हैं उसके बाद उस व्यक्ति को जहा वो कैद या गिरफ़्तार है वहीं उसके लिए डेथ वारंट जारी किया जाता हैं । उस वारंट में अपराधी की  फांसी की तारीख और अपराधी का नाम और केस नंबर के साथ डेथ वारंट को सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी किया जाता है और समय पर उसे फांसी दे दी जाती हैं  |  इस पूरी प्रक्रिया को पूरी होने पर पुष्टि करने के लिए डेथ वारेंट वापिस किया जाता हैं  |

डेथ वारेंट के अनुसार पालन किए जाने वाले कुछ  नियम :-

1 . कोर्ट  के द्वारा उस डेथ वारंट में यह भी लिखा होता है कि उन अपराधियों को फांसी पर कितनी देर तक लटकाया जाना है। अक्सर इस फॉर्म में यही लिखा जाता है कि कैदियों को फाँसी पर तब तक लटकाया जाए जब तक अपराधियों की  मौत ना हो जाए।

2 . कोर्ट के द्वारा जारी किया गया डेथ वारेंट सबसे पहले सीधा जेल प्रशासन के पास पहुंचाया जाता है।

3 . जब अपराधियों को फांसी की सजा दी जाती है और उनकी मौत हो जाती है तो उनकी मौत की पुष्टि करने के बाद डॉक्टर के द्वारा मृत्यु प्रमाण पत्र जारी किया जाता है जिसे बाद में डैथ वारंट के साथ कोर्ट में जमा कराया जाता है।